Indus Vally Civilization in The Ancient History of India | सिंधु घाटी सभ्यता - प्राचीन भारतीय इतिहास

 सिंधु घाटी सभ्यता
Indus Vally Civilization

प्राचीन भारतीय इतिहास
Ancient Indian History 


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सिंधु घाटी सभ्यता
Indus Vally Civilization

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सिंधु घाटी की सभ्यता

यह एक नगरीय सभ्यता थी। यह मातृसत्तात्मक सभ्यता थी|
इसका क्षेत्रफल 1299607 वर्ग किलोमीटर था। 

इसका विस्तार निम्न प्रकार था|
उत्तर दिशा में चिनाब नदी के किनारे मांडा जो वर्तमान में जम्मू कश्मीर राज्य में है|
दक्षिण दिशा में प्रवरा नदी के किनारे दैमाबाद जो वर्तमान में महाराष्ट्र राज्य में है|
पश्चिम दिशा में दशक के नदी के किनारे सूत कांगे डोर जो वर्तमान में बलूचिस्तान पाकिस्तान में है|
पूर्व दिशा में हिंडन नदी के किनारे आलमगीरपुर जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य में है|


इस सभ्यता को सर जॉन मार्शल द्वारा नामकरण किया गया था|
इसके मानचित्र कनिंघम ने बनाए यहां से 9 फसलों के साक्ष्य मिले हैं|
यहां की लिपि बुस्त्रोफोदन थी जोकि दाएं से बाएं तथा बाएं से दाएं की ओर लिखी जाती थी|
इस लिपि में सर्वाधिक यू आकार के शब्द मिले हैं|
यहां से मछली के सर्वाधिक चिन्ह मिले हैं|






हड़प्पा सभ्यता
इसकी खोज सन 1921 में की गई थी|
इस के खोजकर्ता एवं उत्खनन कर्ता दयाराम साहनी थे|
यह स्थान वर्तमान में पाकिस्तान के मिंतगुमरी राज्य में है, जो रावी नदी के किनारे बसा हुआ है|


यहां से प्राप्त हुई मुख्य वस्तुएं-
यहां से मानव की मूर्ति मिली है|
यहां से एच आर 37 नाम का कब्रिस्तान मिला है|
इस कब्रिस्तान के पश्चिमी भाग को माउंट एबी कहां जाता है|
यह नाम सर जॉन मार्शल द्वारा दिया गया था|
यहां से मातृशक्ति की मूर्ति मिली है|
यहां से कर्मचारी के अवशेष मिले हैं|
यहां से एक सींग वाला बेल मिला है|
यहां से महिला के गर्व से निकलता हुआ पौधा मिला है, यह उर्वरता का प्रतीक है|
यहां से लिंग और योनि की पूजा के साक्ष्य मिले हैं|





मोहनजोदड़ो
इसकी खोज सन 1922 में की गई थी|
इस के खोजकर्ता एवं उत्खनन कर्ता राखल दास बनर्जी थे|
यह स्थान वर्तमान में पाकिस्तान के लरकाना राज्य में स्थित है, जो सिंधु नदी के किनारे बसा हुआ है|
मोहनजोदड़ो का अर्थ मृतकों का टीला है|

यहां से प्राप्त हुई मुख्य वस्तुएं-
यहां से नृत्य करती हुई एक महिला की मूर्ति मिली है|
यहां पर सबसे बड़ी इमारत एक स्नानागार थी|
इसे सर जॉन मार्शल ने विश्व का आश्चर्य कहा|
यहां से सर्वाधिक मात्रा में गहने मिले हैं|
यहां से पशुपति शिव की मूर्ति मिली हैं|
सीप के पैमाने और शीशे भी यहीं से मिले हैं|
यहां से हाथी बाघ भैंसा और गेंडे के चित्र मिले हैं|
यहां से हाथी का कपाल खंड मिला है|

कहा जाता है कि इस नगर का सात बार विकास और सात बार पतन हुआ|

नोट: पिग्गर ने हड़प्पा और मोहनजोदड़ो को जुड़वा राजधानी कहा|
नोट: मोहनजोदड़ो से कब्रिस्तान के कोई अवशेष नहीं मिले हैं|


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कालीबंगा
इसकी खोज सन 1953 में की गई थी और उत्खनन सन 1961 में किया गया था|
इस के खोजकर्ता अमला नंद घोष थे|
और उत्खनन कर्ता बी बी लाल और बीके थापर थे|
यह स्थान वर्तमान के राजस्थान राज्य के हनुमानगढ़ जिले में स्थित है, जो घग्घर नदी के किनारे बसा हुआ है|

यहां से प्राप्त हुई मुख्य वस्तुएं-
यहां से अग्निकुंड मिले हैं| 
सर्व प्रथम यहां से जूते हुए खेत मिले हैं|
यहां के घरों की छतें लकड़ी और मिट्टी की बनी होती थी|
यहां से युग्म समाधि के साक्ष्य मिले हैं|
यहां जल निकास की व्यवस्था के लिए लकड़ी की नालियां होती थी|
यहां से तंदूर मिले हैं|
सूत का कपड़ा भी यहीं से मिला है|




लोथल
इसकी खोज सन 1955 में की गई थी|
इसके खोजकर्ता एस आर राव थे|
यह स्थान वर्तमान में गुजरात राज्य में भोगवा नदी के किनारे बसा हुआ है|
यह सिंधु घाटी सभ्यता का बंदरगाह हुआ करता था|

यहां से प्राप्त हुई मुख्य वस्तुएं-
यहां से गोदिवाडा मिला है|
जिसे जहाजों का विश्राम स्थल भी कहा जाता था|
यहां से सर्वप्रथम चावल के साक्ष्य मिले हैं|
यहां से मनके बनाने का कारखाना भी मिला है|
यहां से फारस की बेलनाकार मोहरे मिली है|
बाजरे के साक्ष्य भी यहीं से मिले है|



चहुन्दडों 
इस के खोजकर्ता एम जी मजूमदार थे|
यह स्थान सिंधु नदी के किनारे बसा हुआ है|
यहां से सौंदर्य प्रसाधन के साधन मिले हैं|
यहां से भी मनके बनाने का कारखाना मिला है|
यहां से वक्राकार ईट मिली है|
यहां से झूकर झाकर संस्कृति के अवशेष मिले हैं|



धोलावीरा
इस के खोजकर्ता  उत्खनन कर्ता आर एस बिष्ट थे|
यह स्थान गुजरात राज्य में स्थित है|
धोलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता का अब तक का खोजा गया सबसे बड़ा नगर है|
यह एकमात्र ऐसा नगर है जहां से मध्यम नगर के साक्ष्य मिले हैं|
यहां से स्टेडियम के साक्ष्य मिले हैं|
सूचना पट्ट भी यहीं से मिला है|



बनवाली
इसकी खोज कर्ता उत्खनन कर्ता भी आर एस बिष्ट थे|
यह स्थान वर्तमान में हरियाणा जिले के भगवानपुरा तहसील के नाम से जाना जाता है|



रोपड़
इसके खोजकर्ता एवं उत्खनन कर्ता यक्ष दत्त शर्मा थे|
यह स्थान वर्तमान में पंजाब राज्य में सतलज नदी के किनारे स्थित है|
यही एकमात्र ऐसा स्थल था जो स्वतंत्रता के बाद भी भारत में ही रहा|
यहां से मानव के साथ कुत्ते को दफनाने के साक्ष्य मिले हैं|
यहां से चावल के साक्ष्य मिले हैं|






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English View








Indus Valley Civilization



It was an urban civilization. This was matriarchal civilization.
Its area was 1299607 square kilometers. 

Its expansion was as follows.
Manda on the banks of river Chenab in the north direction, which is presently in the state of Jammu and Kashmir.
Daimabad on the bank of the river Pravara in the south direction is presently in the state of Maharashtra.
In the west direction, the southKangeDor which is presently in Balochistan Pakistan.
In the east direction, Alamgirpur, on the banks of Hindon River, this is currently in the state of Uttar Pradesh.


This civilization was named by Sir John Marshall.
Cunningham made a map of it, there is evidence of 9 crops.
The script here was Bustrofodan which was written from right to left and left to right.
Most U-shaped words are found in this script.
Most of the fish signs have been found here.




Harappan Civilization


It was discovered in 1921.
Its inventor and excavator was Dayaram Sahni.
This place is presently in the state of Mintgumari, Pakistan, which is situated on the banks of river Ravi.

The main items received from here-
A human idol has been found here.
A graveyard named HR 37 has been found from here.
The western part of this graveyard is called Mount AB.
This name was given by Sir John Marshall.
A statue of mother power has been found from here.
The remains of the employee have been found from here.
A horned vine has been found here.
From here, a plant has emerged from the pride of the woman, it is a symbol of fertility.
Evidence of penis and vagina worship has been found from here.




Mohenjodaro


It was discovered in 1922.
The inventor and excavator of this was Rakhal Das Banerjee.
This place is presently located in Larkana state of Pakistan, situated on the banks of the Indus River.
Mohenjodaro means the mound of the dead.

The main items received from here-
A statue of a woman dancing has been found from here.
The largest building here was a bathroom.
Sir John Marshall called it the wonder of the world.
The highest quantity of jewelry has been found here.
The idol of Pashupati Shiva is found here.
Scale and glass of oyster are also found here.
Pictures of elephant tiger buffalo and rhinoceros have been found from here.
Here the elephant skull section is found.
It is said that this city developed seven times and fell seven times.

Note: Piggar called Harappa and Mohenjodaro as twin capitals
Note: No remains of the cemetery have been found from Mohenjodaro.

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Kalibanga


It was discovered in 1953 and excavated in 1961.
The inventor of this was Amala Nand Ghosh.
And the excavators were BB Lal and BK Thapar.
This place is located in Hanumangarh district of present-day Rajasthan state, which is situated on the banks of Ghaggar river.

The main items received from here-
Fire mills have been found here.
First of all, shoes have been found here.
The roofs of the houses here were made of wood and clay.
Evidence of pair mausoleum has been found from here.
Here there were wooden drains for the drainage system.
The oven has been found here.
Cotton cloth is also found here.





Lothal

It was discovered in the year 1955.
Its inventor was SR Rao.
This place is currently located on the banks of the Bhogwa River in the state of Gujarat.
It used to be the port of the Indus Valley Civilization.

The main items received from here-
Godivada is found from here.
This was also known as the resting place of ships.
The first evidence of rice is found here.
A bead making factory has also been found from here.
Cylindrical pieces of Persia have been found from here.
Evidence of Bajra is also found from here.




Chahundo

The inventor of this was MG Majumdar.
This place is situated on the banks of the Indus River.
Cosmetics are available from here.
A bead making factory has also been found from here.
It has got curved briquette from here.
The remains of the culture have been found from here.




Dholavira

The inventor of this was the excavator RS Bisht.
This place is located in the state of Gujarat.
Dholavira is the largest city ever discovered in the Indus Valley Civilization.
This is the only city from which evidence of middle city has been found.
Evidence of the stadium has been found from here.
The notice board is also found from here.





Banwali

Its inventor and excavator was also R.S. Bisht.
This place is currently known as Bhagwanpura tehsil of Haryana district.





Ropar

Its inventor and excavator was Yaksha Dutt Sharma.
This place is presently situated on the banks of the Sutlej River in the state of Punjab.
This was the only place that remained in India even after independence.
Evidence of burying a dog with humans has been found from here.
Evidence of rice has been found from here.
















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