दिल्ली सल्तनत

मध्यकालीन भारत का इतिहास

(Part - I)
Delhi Empire in The History of Medieval India


दिल्ली सल्तनत | मध्यकालीन भारत का इतिहास | History of Medieval India | Delhi Empire



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दिल्ली सल्तनत

(भाग - प्रथम)




भारतीय इतिहास

मध्यकालीन भारत का इतिहास 








भारत पर प्रथम  अरब आक्रमण मोहम्मद बिन कासिम द्वारा किया गया था इसने भारत के शासक दाहिर को हराया।


भारत पर प्रथम तुर्की आक्रमण मोहम्मद गजनवी ने किया इसने भारत पर 17 बार आक्रमण किया|


सबसे महत्वपूर्ण आक्रमण 1024 ईसवी में सोमनाथ मंदिर गुजरात पर किया| यहां किस शासक भीमदेव प्रथम थे।


अंतिम आक्रमण 1027 ईसवी में जाटों के खिलाफ किया।

गजनवी के बाद मोहम्मद गौरी शासक हुआ|


मोहम्मद गोरी ने भारत पर प्रथम आक्रमण 1175 ईस्वी में गुजरात के शासक मूलराज के खिलाफ किया और हार गया।







तराइन का प्रथम युद्ध

तराइन का प्रथम युद्ध 1191 ईस्वी में मोहम्मद गोरी और पृथ्वीराज चौहान के मध्य हुआ जिसमें मोहम्मद गौरी की पराजय हुई।




तराइन का द्वितीय युद्ध

तराइन का द्वितीय युद्ध 1192 ईस्वी में पुणे मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के मध्य हुआ जिसमें पृथ्वीराज चौहान की पराजय हुई और भारत पर मुस्लिम सत्ता कायम हुई।

और दिल्ली सल्तनत ने भारत पर शासन प्रारंभ किया|





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दिल्ली सल्तनत



तराइन के दूसरे युद्ध को जीतने के बाद सन 1206 में जब मोहम्मद गोरी भारत से लौट रहा था| तभी सिंध के रास्ते में खोखर जाति द्वारा मोहम्मद गौरी की हत्या कर दी गई।
मोहम्मद गोरी के तीन मुख्य गुलाम थे- कुतुबुद्दीन ऐबक, कुबाचा और यल्दौज़।

इनमें से कुतुबुद्दीन ऐबक को भारत का नया उत्तराधिकारी बनाया गया।



गुलाम या दास वंश
(सन 1206 से 1290 तक)


कुतुबुद्दीन ऐबक
सन 1206 से 1210

मुद्दीन युवक ने दिल्ली में गुलाम वंश की नींव डाली इसके अन्य उपाधियां थी लाखबख्श और हातिमताई।
कुतुबुद्दीन ऐबक को स्वतंत्र सुल्तान नहीं माना जाता था। इन्होंने ना तो सिक्के जारी करवाएं और ना ही खुतबा (अधिकार पत्र) पढवाया।
कुतुबुद्दीन ऐबक ने कुब्बत ए इस्लाम नामक मस्जिद का निर्माण करवाया जो कि हिंदू इस्लामिक शैली की प्रथम मस्जिद थी इस मस्जिद का पश्चिमी द्वार अलाई दरवाजा कहलाता है जिसका निर्माण अलाउद्दीन खिलजी ने करवाया था।


कुतुबुद्दीन ऐबक ने अजमेर में अड़ाई दिन का झोपड़ा बनवाया जो कि पहले संस्कृत विद्यालय था जिसका निर्माण विग्रहराज चतुर्थ ने करवाया था।
कुतुबुद्दीन ऐबक ने क़ुतुब मीनार की नींव सन 1199 में रखी कुतुबमीनार अमीर बख्तियार की याद में बनवाई गई जिसको बाद में इल्तुतमिश ने पूरा करवाया।
कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपनी पुत्री का विवाह इल्तुतमिश से किया।
सन 1210 में कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु चौगान खेलते समय घोड़े से गिरने से हो गई।














इल्तुतमिश
सन 1210 से 1236



इल्तुतमिश ने कुतुबुद्दीन ऐबक के पुत्र आराम शाह की हत्या कर के राजगद्दी प्राप्त की।
इल्तुतमिश को ही दिल्ली सल्तनत का प्रथम स्वतंत्र सुल्तान माना जाता है।
इल्तुतमिश ने अपनी राजधानी लाहौर से बदलकर दिल्ली स्थानांतरित की उन्होंने अपने दरबार में न्याय की जंजीर लगवाई।
इल्तुतमिश ने 90 गुलामो का दल बनाया जिसे तुरकान ए चहलगामी कहा गया।
इल्तुतमिश की सेना को कल्व ए लश्कर कहा गया।
इल्तुतमिश ने ही मकबरा परंपरा की शुरुआत की और अपने पुत्र की याद में प्रथम मकबरा सुल्तान गढ़ी बनवाया।
इल्तुतमिश ने 1228 में बगदाद के खलीफा से सुल्तान पद की स्वीकृति प्राप्त की।
इन्होंने जीतल (तांबे के सिक्के) टांका (चांदी के सिक्के) चलाएं इल्तुतमिश ने सुल्तान के पद को वंशानुगत किया और रजिया सुल्तान को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।












रजिया सुल्तान
सन 1236 से 1240



रजिया सुल्तान भारत की प्रथम महिला मुस्लिम सुल्तान थी।
रजिया सुल्तान ने अपनी मां शाहतुर्कान और भाई रुकमुद्दीन को पराजित करके गद्दी प्राप्त की।
रजिया सुल्तान के पति का नाम अल्तूनिया था।
रजिया सुल्तान ने जलालुद्दीन याकूत को अमीर ए आखूर (अश्वशाला) का प्रधान बनाया। यह रजिया सुल्तान का प्रेमी था। दिल्ली के अमीरों को इस संबंध से ऐतराज था।
सन 1240 में कैथल के निकट रजिया सुल्तान और अल्तूनिया की हत्या कर दी गई।

बलवन
सन 1266 से 1286



बलवन ने राजत्व के सिद्धांत को अपनाया।
राजत्व का मतलब था राजा को ईश्वर का अवतार मानना।
बलवन ने रक्त और लौह की नीति अपनाई। इन्होंने अपने दरबार में हंसी और मद्यपान पर रोक लगाई।


बलबन ने अपने दरबार में तीन इरानी प्रथाएं चलाई-
सजदा -सुल्तान के सामने घुटनों के बल बैठकर सलाम करना।
पायबोस -सुल्तान के कदम चूमना।
नवरोज -नया संवत (ईरानी नव वर्ष)।


यह बलवन का ही कथन था की "जब भी मैं किसी कुलीन को देखता हूं तो मेरे शरीर में क्रोध उफनने लगता है मेरा हाथ तलवार पर चला जाता है"।
बलबन ने जिल्ले इलाही की उपाधि प्राप्त की।
बलवन से पहले नसीरुद्दीन महमूद शासक था जिसकी सत्ता की असली बागडोर बलबन के ही हाथों में थी।
बलबन के पुत्र क्युमर्स की हत्या सन 1290 में जलालुद्दीन खिलजी ने की थी।









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Delhi Sultanate(Part - I)

Delhi Empire in The History of Medieval India




The first Arab invasion of India was done by Mohammed bin Qasim, who defeated Dahir, the ruler of India.

The first Turkish invasion of India was done by Mohammad Ghaznavi, he attacked India 17 times.

The most important invasion was the Somnath temple in 1024 AD on Gujarat. Which ruler Bhimdev was the first here.

The last invasion was made against the Jats in 1027 AD.

Muhammad Ghauri became the ruler after Ghaznavi.

Mohammad Ghori made the first invasion of India in 1175 AD against the ruler of Gujarat, Mulraj.






First Battle of Tarain



The first battle of Tarain took place between Mohammad Ghori and Prithviraj Chauhan in 1191 AD, in which Mohammad Ghori was defeated.





Second Battle of Tarain



The Second Battle of Tarain occurred in 1192 AD between Pune Mohammad Gauri and Prithviraj Chauhan, in which Prithviraj Chauhan was defeated and Muslim power was established over India.



And Delhi Sultanate started ruling India.








Delhi Sultanate


After Mohammad Ghori was returning from India in 1206, after winning the second war of Tarain. Then Mohammad Gauri was killed by the Khokhar caste on the way to Sindh.

Mohammad Ghori had three main slaves - Qutbuddin Aibak, Qubacha and Yaldouz.

Of these, Qutubuddin Aibak was made the new heir of India.






Slave or slave dynasty
(From 1206 to 1290)







Qutbuddin Aibak
1206 to 1210




The young man laid the foundation of the Ghulam dynasty in Delhi. Its other titles were Lakhbakhsh and Hatimatai.

Qutbuddin Aibak was not considered an independent sultan. He neither issued the coins nor taught the khutba (authority letter).


Qutbuddin Aibak built a mosque named Qubbat-e-Islam, which was the first Hindu-style mosque, the western gate of this mosque is called Alai Darwaza, which was built by Alauddin Khilji.

Qutubuddin Aibak built the Adhai Din hut in Ajmer, which was the first Sanskrit school built by Vigraharaj IV.

Qutubuddin Aibak laid the foundation of Qutub Minar in 1199 in memory of Qutub Minar Amir Bakhtiyar, which was later completed by Iltutmish.

Qutbuddin Aibak married his daughter to Iltutmish.


Qutbuddin Aibak died in 1210 from falling from a horse while playing Chaugan.








Iltutmish
1210 to 1236



Iltutmish obtained the throne by killing Aram Shah, the son of Qutbuddin Aibak.

Iltutmish is considered to be the first independent Sultan of the Delhi Sultanate.

Iltutmish shifted his capital from Lahore to Delhi, and chaired justice in his court.

Iltutmish formed a contingent of 90 slaves called Turkan e Chahalgami.


Iltutmish's army was called Kalve-e-Lashkar.

Iltutmish started the tomb tradition and built the first tomb Sultan Garhi in memory of his son.

Iltutmish received the title of Sultan from the Caliph of Baghdad in 1228.


He won the Jeetal (copper coins) stitches (silver coins) Iltutmish inherited the rank of Sultan and declared Razia Sultan as his successor.








Razia Sultan
1236 to 1240


Razia Sultan was the first female Muslim Sultan of India.

Razia Sultan gained the throne by defeating his mother Shahturkan and brother Rukmuddin.

The husband of Razia Sultan was named Altunia.

Razia Sultan made Jalaluddin Yakut the head of Amir-e-Aakhur (Ashwala). It was the lover of Razia Sultan. The rich of Delhi had reservations about this relationship.


In 1240, Razia Sultan and Altunia were killed near Kaithal.










Balwan
1266 to 1286


Balavan adopted the principle of kingship.

Raja means the king as an incarnation of God.

Balavan adopted the policy of blood and iron. He prohibited laughter and drinking in his court.

Balban ran three Iranian practices in his court -

Sitting on the knees in front of Sajda-Sultan.

Pybos - Kissing the Sultan's Steps.


Navroz-Naya Samvat (Iranian New Year).

It was Balvan's statement that "whenever I see an aristocrat, I feel anger in my body, my hand goes to the sword".

Balban received the title of Jille Ilahi.

Before Balwan, Naseeruddin Mahmud was the ruler whose real reins of power were in the hands of Balban.


Balban's son Kumars was assassinated in 1290 by Jalaluddin Khilji.











Part - II is Coming Soon...








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